Description
“इस किताब की सबसे बड़ी सीख यह नहीं कि आपने झूठ पकड़ना सीख लिया। सीख यह है कि आपने ठीक से सुनना सीख लिया।”
सच की परख — लोगों को पढ़ने और सही सवाल पूछने की कला प्रशांत सुमन की एक व्यावहारिक, शोध-आधारित किताब है। यह पहले पन्ने से ईमानदार है: आप शरीर की भाषा देखकर झूठ पक्के तौर पर नहीं पकड़ सकते, और यह किताब दिखाती है कि उसकी जगह असल में क्या काम करता है।
इस किताब में आपको क्या मिलेगा
- शरीर की भाषा के मिथक क्यों फेल होते हैं, और सटीकता सच में किससे बढ़ती है
- बेसलाइन कैसे बनाएँ और असली बदलाव कैसे पहचानें
- बयान को ठीक से सुनना: ब्योरा, समय की छलाँग और भाषा में बदलाव
- उल्टे क्रम का सवाल, ब्योरे का बोझ और चुप्पी की ताकत
- सवालों की कीप: खुला, फैलाने वाला, जाँचने लायक, फिर बंद
- निर्दोष को गलती से दोषी मानने से कैसे बचें
- मुश्किल बातचीत और काम की जगह पर इस्तेमाल
किताब के अंदर
- 16 अध्याय आसान भाषा में, हर अध्याय के अंत में अभ्यास के साथ
- 5 स्क्रिप्ट शीट जिन्हें प्रिंट करके किसी ज़रूरी बातचीत से पहले देखा जा सकता है
- 30 दिन का अभ्यास कार्यक्रम, चार हफ्तों में पूरी तकनीक तक
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और आगे पढ़ने के सुझाव
यह किसके लिए है
उनके लिए जो बातचीत में बेहतर सवाल पूछना चाहते हैं: नौकरी, रिश्तों और रोज़ की बातचीत में। यह किताब आपको जज बनाना नहीं सिखाती, बेहतर सवाल पूछना सिखाती है। यह चिकित्सा, कानूनी या जाँच-संबंधी सलाह नहीं है।
तुरंत डिजिटल डाउनलोड (PDF)। भुगतान के बाद डाउनलोड लिंक आपके ईमेल पर भी भेजा जाता है।





Reviews
There are no reviews yet.