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दूसरों के मन की बात पढ़ना सीखिए16 आसान अध्याय · बिना किसी जादू के
माइंड हैकर: बॉडी लैंग्वेज और फेस रीड करने की कला सीखें
पेमेंट के बाद तुरंत eBook · Razorpay से सुरक्षित पेमेंट · फोन, टैबलेट या लैपटॉप, कहीं भी पढ़ें
प्रशांत सुमन की किताब · दिमाग पढ़ने की आसान गाइड

लोग क्या सोच रहे हैं, ये समझना सीखिए। बिना किसी जादू के।

यह जादू नहीं, मनोविज्ञान है। इस किताब से आप सीखेंगे कि लोग कैसे सोचते हैं, और दोस्तों-परिवार के सामने ऐसे पल कैसे बनाएँ जो उन्हें लंबे समय तक याद रहें।

  • 16 आसान अध्याय, जो आप पढ़ते ही उसी दिन आज़मा सकते हैं
  • 7 स्क्रिप्ट शीट: क्या बोलना है, लाइन-दर-लाइन लिखा हुआ (प्रिंट करके रखिए)
  • 30 दिन का प्लान, रोज़ सिर्फ़ 20–30 मिनट
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₹199एक बार पेमेंट · किताब हमेशा आपकी
तुरंत डिजिटल डाउनलोडRazorpay से सुरक्षित पेमेंटहाथ की सफ़ाई की ज़रूरत नहीं
माइंड हैकर: दिमाग और व्यवहार समझने की कला, लेखक प्रशांत सुमन
खुद आज़माकर देखिए

एक नंबर सोचिए। मैं बता दूँगा आपने क्या सोचा।

1 से 50 के बीच एक नंबर सोचिए। शर्त: उसके दोनों अंक विषम (1, 3, 5, 7, 9) हों और अलग-अलग हों। फिर नीचे वही नंबर दबाइए।

शर्त: दोनों अंक विषम हों और अलग-अलग हों।

अध्याय 2–4

हमारा दिमाग इतना अंदाज़े में क्यों आ जाता है

किसी से कहिए “कोई भी नंबर सोच लो”, तो उसे लगता है कि वह कुछ भी चुन सकता है। पर असल में वह पाँच-छह नंबरों में से ही चुनता है। बाकी नंबर दिमाग चुपचाप हटा देता है, और उसे पता भी नहीं चलता।

दिमाग पैटर्न बनाता है

लोग सच में रैंडम नहीं चुन पाते। वे वही चुनते हैं जो उन्हें “काफ़ी रैंडम” लगे, और यहीं वे पकड़ में आ जाते हैं।

शब्द रास्ता तय कर देते हैं

आप जिस तरह बोलते हैं, उसी से चुनाव पहले ही तय हो जाता है, और सामने वाले को लगता है कि उसने सब अपनी मर्ज़ी से चुना।

ध्यान टॉर्च की तरह है

इंसान एक बार में एक ही चीज़ देखता है। जब आपको पता हो कि टॉर्च कहाँ है, तो यह भी पता होता है कि कमरे का कौन-सा कोना अँधेरे में है।

याद एक कहानी है

बाद में लोगों को यह याद नहीं रहता कि असल में क्या हुआ था। उन्हें वह याद रहता है जो उन्होंने महसूस किया। यही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।

अध्याय 12

चुनने को सब कुछ। पहुँचे सब एक ही जगह।

ऐसा दो अंकों का नंबर माँगिए जिसके दोनों अंक विषम हों और अलग-अलग हों, तो 50 में से सिर्फ़ आठ नंबर बचते हैं। ज़्यादातर लोग एक ही नंबर पर पहुँच जाते हैं। कभी गाजर, कभी लाल हथौड़ा, कभी डेनमार्क का भूरा हाथी: इशारे अलग-अलग, मंज़िल एक।

  • 37 वाला फ़ोर्स: पूरी स्क्रिप्ट, एक-एक लाइन के साथ, और गड़बड़ हो जाए तो बच निकलने का तरीका
  • ऐसे शब्द-फ़ोर्स जो लगभग हर बार काम करते हैं
  • इक्वीवोक: ऐसा चुनाव जो हर हाल में वहीं पहुँचता है जहाँ आप चाहते हैं

यह किस्मत नहीं, इंसान की फ़ितरत है।

अलग-अलग सुराग, एक ही नंबर: 37
पेशकश

यह जादू नहीं है। सारा खेल पेशकश का है।

तरीका सिर्फ़ दस प्रतिशत है, बाकी नब्बे प्रतिशत पेशकश। दो लोग एक ही ट्रिक करें, तो एक को मिलता है “अच्छा था”, और दूसरे को रोंगटे खड़े कर देने वाली प्रतिक्रियाएँ। माइंड हैकर आपको यही फ़र्क सिखाती है।

  • धीरे चलिए: आराम से करेंगे तो सोच-विचार लगेगा, जल्दी करेंगे तो ट्रिक
  • नतीजा एक बार में मत बताइए, टुकड़ों में खोलिए
  • अपनी स्क्रिप्ट लिखिए और इतना दोहराइए कि सब अपने आप निकलता लगे
  • एक ही ट्रिक दोबारा मत दिखाइए, और गड़बड़ हो जाए तो घबराइए मत
  • शर्तें एक बार फिर दोहराइए: यही वह लाइन है जो लोग बाद में दूसरों को सुनाएँगे
खुलासे से पहले रुकता हुआ परफ़ॉर्मर और शांत दर्शक
आप क्या सीखेंगे

असली तरीके। एक-एक कदम करके।

हर अध्याय के अंत में अभ्यास है। यह सिर्फ़ पढ़ने से नहीं, बार-बार करके ही आता है।

फ़ोर्सिंग

सामने वाला वही चुने जो आप चाहते हैं, और उसे लगे कि उसने अपनी मर्ज़ी से चुना। चार तरीके, जो आप आज रात सिर्फ़ बातों से आज़मा सकते हैं।

इक्वीवोक

जादूगरों वाली चाल: सवाल-जवाब का ऐसा रास्ता जो हर हाल में आपके मनचाहे जवाब पर पहुँचता है।

कोल्ड रीडिंग

अजनबी को ऐसी बातें बताना जो उसे अपनी लगें। और अगर बात ग़लत निकले, तो उसे कैसे सँभालें।

झलक और बीच की फाड़

किताब का सबसे काम का हिस्सा: 100 से ज़्यादा ट्रिक के पीछे का 7 कदम वाला तरीका। यहाँ हाथ की नहीं, सही टाइमिंग की सफ़ाई काम आती है।

वन-अहेड

हमेशा एक कदम आगे रहने की तरकीब। छोटी-मोटी चूक भी अपने आप सँभल जाती है।

मसल रीडिंग

शरीर के छोटे-छोटे अनजाने इशारे पढ़कर छिपी चीज़ ढूँढ़ना। इसमें कोई चालाकी नहीं।

सजेशन टेस्ट

उँगलियाँ अपने आप जुड़ना, हाथों का भारी-हल्का लगना, पेंडुलम का हिलना। सुरक्षित, असली और मज़ेदार।

ईमानदारी से बॉडी लैंग्वेज

इशारों से झूठ क्यों नहीं पकड़ा जा सकता, और आप भरोसे के साथ क्या पढ़ सकते हैं।

दस मिनट का पूरा सेट

पाँच स्टेप, जेब में कुछ नहीं। अलग-अलग ट्रिक को जोड़कर एक यादगार शो बनाने का सही क्रम।

अध्याय 16

सिर्फ़ 30 दिन में पहला असली शो।

सिर्फ़ पढ़ने से कोई मेंटलिस्ट नहीं बनता, प्लान पूरा करने से बनता है। रोज़ 20–30 मिनट लगाइए, और 30वें दिन असली लोगों के सामने पूरा शो कीजिए।

पहला हफ़्ताबुनियाद और पहला फ़ोर्स
दूसरा हफ़्ताइक्वीवोक और शब्द-फ़ोर्स
तीसरा हफ़्ताकोल्ड रीडिंग और लोगों को पढ़ना
चौथा हफ़्ताझलक, वन-अहेड और पूरा सेट

साथ में 7 स्क्रिप्ट शीट हैं, शो से पहले बस एक नज़र डालने के लिए।

चार हफ़्तों में 30 दिन की योजना
अध्याय 13

बेहतर बातचीत। बेहतर मौके।

यह सिर्फ़ स्टेज के लिए नहीं है। लोगों को पढ़ना सीखने का मतलब है ध्यान से सुनना सीखना: चेहरे का बदलता भाव, आवाज़ का उतार-चढ़ाव, बात के पीछे की झिझक।

  • दो मिनट की एक ट्रिक से अनजान लोगों से बातचीत शुरू कीजिए
  • महफ़िल में वह इंसान बनिए जिसे सब याद रखें
  • दोस्त, जीवनसाथी और प्रोफ़ेशनल के रूप में बेहतर सुनने वाले बनिए
  • अपनी मौजूदगी का असर बढ़ाइए: ठहराव, संयम और दबाव में भी शांत रहना
बातचीत में आवाज़ के लहजे, ठहराव और हाव-भाव के संकेत
16अध्याय, शुरुआत से लेकर पूरे शो तक
7स्क्रिप्ट शीट, जिनमें असली बातचीत के लिए तैयार लाइनें हैं
30दिन का प्लान, रोज़ 20–30 मिनट, और आप असली शो के लिए तैयार
सीधी बात

यह किताब क्या है, और क्या नहीं

हम चाहते हैं कि आप सब जानकर ही खरीदें।

यह है

  • व्यावहारिक मनोविज्ञान, ध्यान भटकाने की कला और पेशकश
  • मनोरंजन और परफ़ॉर्मेंस आर्ट
  • बेहतर ऑब्ज़र्वर और श्रोता बनने का तरीका
  • ईमानदारी पर टिकी हुई: आप कभी किसी असली शक्ति का दावा नहीं करते

यह नहीं है

  • कोई अलौकिक, आध्यात्मिक या रहस्यमय चीज़
  • बॉडी लैंग्वेज से झूठ पकड़ने का तरीका (यह कोई नहीं कर सकता)
  • सम्मोहन (हिप्नोसिस): सुरक्षा के लिए जानबूझकर नहीं रखा, और वजहें किताब में बताई हैं
  • पैसे या फ़ायदे के लिए किसी को ठगने का हथियार

माइंड हैकर किसके लिए है

  • जिन्हें जानना है कि दिमाग असल में कैसे काम करता है
  • शुरुआत करने वाले, जिन्हें साफ़ और आसान रास्ता चाहिए
  • शांत और शर्मीले लोग (ऊँची आवाज़ से ज़्यादा काम आता है शांत आत्मविश्वास)
  • जो पार्टी और मीटिंग में सबसे यादगार इंसान बनना चाहते हैं
  • शादी, कार्यक्रम और कॉलेज फ़ंक्शन में परफ़ॉर्म करने की चाह रखने वाले
  • जो रोज़ की ज़िंदगी में लोगों को बेहतर सुनना और समझना चाहते हैं
आज ही माइंड हैकर लीजिए

जो चाहिए, सब एक ही डाउनलोड में।

  • माइंड हैकर: दिमाग और व्यवहार समझने की कला (16 अध्याय)
  • 7 स्क्रिप्ट शीट, प्रिंट करने के लिए तैयार
  • 30 दिन का पूरा प्लान
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सवाल-जवाब

आपके सवाल, हमारे जवाब

क्या यह असली माइंड रीडिंग है?

नहीं, और किताब यह पहले पन्ने पर ही साफ़ कह देती है। मेंटलिज़्म असल में मनोविज्ञान, ध्यान भटकाने की कला, एक्टिंग और कुछ चतुर तकनीकों का मेल है। आप कभी किसी शक्ति का दावा नहीं करते। जब आप कहते हैं “यह मनोविज्ञान और प्रैक्टिस है”, तो लोग अक्सर और ज़्यादा प्रभावित होते हैं।

क्या हाथ की सफ़ाई या कोई ख़ास सामान चाहिए?

नहीं। फ़ोर्सिंग के तरीके सिर्फ़ बोलकर होते हैं। बीच की फाड़ के लिए छोटा कागज़ और पेन चाहिए। और दस मिनट के सेट वाले अध्याय में तो जेब में कुछ भी नहीं चाहिए।

मैं शर्मीला हूँ। क्या यह मेरे लिए है?

बिल्कुल, और शायद आपके लिए यह और आसान हो। मेंटलिज़्म में ऊँची आवाज़ की ज़रूरत नहीं होती। धीमी आवाज़, लंबी चुप्पी और शांत आत्मविश्वास जोश से ज़्यादा असर करते हैं। आप सिर्फ़ एक इंसान के सामने भी शुरू कर सकते हैं।

क्या इसमें हिप्नोसिस सिखाई गई है?

नहीं। हिप्नोसिस जानबूझकर नहीं रखी गई, क्योंकि उसे किताब से सुरक्षित तरीके से नहीं सीखा जा सकता। इसकी जगह अध्याय 9 में सजेशन टेस्ट हैं, साफ़ सुरक्षा नियमों के साथ।

अच्छा बनने में कितना वक्त लगेगा?

एक ट्रिक अच्छे से सीखने में करीब एक हफ़्ता लगता है। भरोसे लायक दस मिनट का सेट तैयार होने में तीस दिन। सब कुछ सीखना ज़रूरी नहीं: तीन ट्रिक कमाल की करना, बीस ट्रिक ठीक-ठाक करने से कहीं बेहतर है।

किताब मुझे कैसे मिलेगी?

पेमेंट के तुरंत बाद डाउनलोड लिंक स्क्रीन पर दिखता है और ईमेल पर भी आता है। यह एक PDF है, जिसे आप फोन, टैबलेट या लैपटॉप, कहीं भी पढ़ सकते हैं।

पेमेंट कैसे करूँ?

चेकआउट Razorpay से सुरक्षित है: UPI, क्रेडिट-डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग, सब चलता है।

सिर्फ़ पढ़ते मत रहिए। आज़माना शुरू कीजिए।

जो ट्रिक आपने सौ बार दोहराई हो, वह उन बीस ट्रिक से ज़्यादा असर करती है जिन्हें आपने बस पढ़ा है। आज रात ही पहला अध्याय खोल लीजिए।

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माइंड हैकर मनोरंजन, परफ़ॉर्मेंस आर्ट और मनोविज्ञान की व्यावहारिक जानकारी के लिए है। यह किसी अलौकिक शक्ति का दावा नहीं करती, और न ही यह चिकित्सा, मानसिक स्वास्थ्य, कानूनी या वित्तीय सलाह है। © प्रशांत सुमन।

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